
देखना है – Yet To See
दोस्तों, मैं एक बार फिरसे हाजिर हूँ अपनी कलम के साथ। कृपया मेरी नई शायरी का आनंद लें जिसका शीर्षक मैंने रखा है “देखना है - Yet To See”। क्योंकि अभी तो और भी देखना है।

Let words reach the world…

Let words reach the world…

दोस्तों, मैं एक बार फिरसे हाजिर हूँ अपनी कलम के साथ। कृपया मेरी नई शायरी का आनंद लें जिसका शीर्षक मैंने रखा है “देखना है - Yet To See”। क्योंकि अभी तो और भी देखना है।

मेरी इस कविता "दंश (The Wound)" की शैली जापानी लघु कविताओं की शैली "हाइकू" से प्रेरित है।
Style of this poem of mine "दंश (The Wound)", is inspired by a style of Japanese short poems known as "Haiku".

Friends, I am here once again with my Original Pen. Philosophy of this poem of mine is, “The Seed of Today is Tomorrow’s Tree”. Title of this poem of mine is “आज से ही कल है (Tomorrow Is From Today)”.…

हे कृष्ण (He Krishn). This poem of mine is dedicated to god Krishn. मेरी यह कविता भगवान कृष्ण को समर्पित है। जय श्री कृष्ण।

Friends, I am here once again with my Original Pen. Please enjoy my new Shayri (Poetry) which I have titled as “हौसला (Morale)”. Please let me know if its lines (Sher) stir the heart. दोस्तों, मैं एक बार फिरसे हाजिर…

Friends, I am here once again with my Original Pen. Please enjoy my new Ghazal which I have titled as "भटक रहा हूँ (Wandering)".